आरती
विघ्नहर्ता गणपति की उपासना किसी भी मंगल कार्य के आरंभ में की जाती है; मोदक और दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है।
पूरा पढ़ेंदेवी-देवताओं की आरती, उनकी प्रमुख पंक्तियाँ, अर्थ और आरती करने का सरल तरीका।
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विघ्नहर्ता गणपति की उपासना किसी भी मंगल कार्य के आरंभ में की जाती है; मोदक और दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है।
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आरती
महादेव की आरती में शिव के निराकार और साकार दोनों स्वरूपों को याद किया जाता है; बिल्वपत्र और जल अर्पण सामान्य प्रथा है।
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आदिशक्ति की स्तुति नवरात्रि में विशेष लोकप्रिय है; लाल पुष्प, दीपक और भक्ति भाव से पूजा की जाती है।
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बजरंगबली की उपासना निर्भयता, सेवा और श्रीराम भक्ति की प्रेरणा देती है; मंगलवार और शनिवार को विशेष पाठ होता है।
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माँ लक्ष्मी की उपासना समृद्धि के साथ उदारता, स्वच्छता और कृतज्ञता का स्मरण कराती है।
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आरती
विद्या, वाणी और कला की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती की आराधना बसंत पंचमी पर विशेष की जाती है।
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आरती
विष्णु आराधना जीवन में संतुलन, संरक्षण और करुणा को याद करने का अवसर है।
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आरती
मुरलीधर की आरती में वृंदावन की मधुर भक्ति, गीता का ज्ञान और प्रेम भाव याद किए जाते हैं।
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आरती
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन से सत्य, मर्यादा, सेवा और कर्तव्य का संदेश मिलता है।
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गंगा आरती नदी के प्रति श्रद्धा के साथ जल-संरक्षण और पर्यावरण स्वच्छता की प्रेरणा देती है।
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आरती
शनि उपासना धैर्य, कर्म और न्याय की भावना को रेखांकित करती है; शनिवार को स्मरण की परंपरा है।
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आरती
सूर्य पूजा में प्रकाश, ऊर्जा, अनुशासन और नए दिन के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रमुख है।
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