LAVORA Bhagti
महाभारत · Sauptika Parva

शाप और प्रतिशोध का दुष्चक्र

सौप्तिकपर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 2/2।

शाप और प्रतिशोध का दुष्चक्र

सौप्तिकपर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 2/2।

बचे हुए लोग रात्रि-आक्रमण के भयानक परिणामों का सामना करते हैं। अश्वत्थामा का कृष्ण और पाण्डवों से सामना होता है तथा उनके कर्मों का दीर्घकालिक भार बताने वाला शाप प्रसंग आता है। कथा चेतावनी देती है कि प्रतिशोध एक घटना पर समाप्त नहीं होता; वह पीढ़ियों तक पीड़ा पहुँचा सकता है।

नैतिक जटिलता और दुखद परिणामों सहित संपूर्ण कथाक्रम समझने के लिए अन्य पर्व भी क्रम से पढ़ें।

पाठ संबंधी सूचना

यह हमारा मौलिक संक्षिप्त पुनर्कथन/मार्गदर्शक है; मूल ग्रंथ के समस्त श्लोक या किसी आधुनिक अनुवाद की प्रतिलिपि नहीं है। अलग परंपराओं में कुछ विवरण अलग हो सकते हैं।

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