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महाभारत · Bhishma Parva

अर्जुन का विषाद और भगवद्गीता

भीष्मपर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 1/2।

अर्जुन का विषाद और भगवद्गीता

भीष्मपर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 1/2।

सामने गुरुजनों, भाइयों और बड़ों को देखकर अर्जुन युद्ध से विमुख हो जाते हैं। कृष्ण आत्मा, कर्म, भक्ति, ज्ञान और फलासक्ति से मुक्त होकर कर्तव्य करने का उपदेश देते हैं। भगवद्गीता युद्ध की पीड़ा को मिटाती नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण धर्म-निर्णय का आग्रह करती है। अर्जुन का मोह दूर होता है और वे कर्म के लिए तत्पर होते हैं।

नैतिक जटिलता और दुखद परिणामों सहित संपूर्ण कथाक्रम समझने के लिए अन्य पर्व भी क्रम से पढ़ें।

पाठ संबंधी सूचना

यह हमारा मौलिक संक्षिप्त पुनर्कथन/मार्गदर्शक है; मूल ग्रंथ के समस्त श्लोक या किसी आधुनिक अनुवाद की प्रतिलिपि नहीं है। अलग परंपराओं में कुछ विवरण अलग हो सकते हैं।

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