महाप्रस्थानिकपर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 1/2।
युधिष्ठिर अगली पीढ़ी को राज्य सौंपकर राजसिंहासन त्याग देते हैं। द्रौपदी और चारों भाइयों के साथ वे उत्तर दिशा में अंतिम यात्रा पर निकलते हैं; एक कुत्ता भी साथ चलता है। मार्ग में साथी एक-एक करके गिरते जाते हैं। युधिष्ठिर मोह, सद्गुण और मृत्यु की सीमाओं के बीच आगे बढ़ते हैं।
नैतिक जटिलता और दुखद परिणामों सहित संपूर्ण कथाक्रम समझने के लिए अन्य पर्व भी क्रम से पढ़ें।
