सभापर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 2/2।
बड़े-बुज़ुर्ग गंभीर अपमान और संघर्ष को रोक नहीं पाते। पुनः द्यूत के परिणामस्वरूप पाण्डवों को बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष अज्ञातवास स्वीकार करना पड़ता है। वे द्रौपदी सहित नगर छोड़ते हैं और कठिन निर्णय के बीच गरिमा बनाए रखते हैं। सभा के घाव आगे की पूरी कथा को प्रभावित करते हैं।
नैतिक जटिलता और दुखद परिणामों सहित संपूर्ण कथाक्रम समझने के लिए अन्य पर्व भी क्रम से पढ़ें।
