सत्यनारायण व्रत विष्णु भगवान के प्रति कृतज्ञता, सत्य और श्रद्धा व्यक्त करने का पारंपरिक अनुष्ठान है। इसकी कथा में निर्धन ब्राह्मण, लकड़हारा, व्यापारी और राजपरिवार से जुड़े प्रसंग आते हैं। सब सीखते हैं कि वचन निभाना तथा प्राप्त सुख को बाँटना बाहरी विधि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। कई परिवार पूर्णिमा को कथा सुनते और प्रसाद वितरित करते हैं। क्षेत्र के अनुसार परंपराएँ अलग हो सकती हैं; पूजा श्रद्धा से की जानी चाहिए, भय के कारण नहीं।
यह लेख भक्ति-अध्ययन के लिए मौलिक परिचय है। जहाँ परंपराओं में अंतर हो, वहाँ विश्वसनीय ग्रंथ और अपनी परंपरा के मार्गदर्शन का आदर करें।


