उत्तरकाण्ड — 3 में से भाग 3। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।
समापन प्रसंगों में सीता पृथ्वी माता को अपनी पवित्रता की साक्षी बनाकर उनकी गोद में समा जाती हैं। राम अपना राजधर्म निभाते रहते हैं और बाद में उनकी पृथ्वी-लीला का भी अंत होता है। विभिन्न रामायणों में शब्द, बल और शामिल प्रसंग अलग-अलग हैं; यह पुनर्कथन सातों काण्डों की मुख्य कथा प्रस्तुत करता है, किसी पूर्ण मूल ग्रंथ का अक्षरशः पाठ नहीं।
यह प्रसंग धर्म, करुणा और निर्णयों के परिणाम पर विचार करने की प्रेरणा देता है। संपूर्ण कथा का क्रम समझने के लिए काण्ड के अगले अध्याय भी पढ़ें।
