बालकाण्ड — 3 में से भाग 3। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।
मिथिला में राजा जनक शिवधनुष से जुड़ा स्वयंवर आयोजित करते हैं। राम धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते हैं और वह टूट जाता है। उनके सामर्थ्य में अहंकार नहीं है। सीता और राम का विवाह उत्सवपूर्वक संपन्न होता है और चारों राजकुमारों के विवाह से दोनों कुलों का संबंध दृढ़ होता है। यात्रा अयोध्या लौटने और सुखद भविष्य की आशा के साथ आगे बढ़ती है।
यह प्रसंग धर्म, करुणा और निर्णयों के परिणाम पर विचार करने की प्रेरणा देता है। संपूर्ण कथा का क्रम समझने के लिए काण्ड के अगले अध्याय भी पढ़ें।
