अयोध्याकाण्ड — 3 में से भाग 1। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।
दशरथ राम के राज्याभिषेक की तैयारी करते हैं और अयोध्या आनंदित हो उठती है। मंथरा के उकसावे पर कैकेयी राजा से पूर्व में दिए गए दो वर माँगती हैं—भरत का राज्याभिषेक और राम को चौदह वर्ष का वनवास। वचन तथा पुत्रप्रेम के बीच दशरथ टूट जाते हैं। राम पिता के वचन की मर्यादा रखने के लिए शांत भाव से वनवास स्वीकार करते हैं।
यह प्रसंग धर्म, करुणा और निर्णयों के परिणाम पर विचार करने की प्रेरणा देता है। संपूर्ण कथा का क्रम समझने के लिए काण्ड के अगले अध्याय भी पढ़ें।
