अयोध्याकाण्ड — 3 में से भाग 2। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।
सीता राम के साथ चलने का निश्चय करती हैं और लक्ष्मण सेवा तथा रक्षा के लिए साथ जाते हैं। तीनों राजमहल का सुख छोड़ देते हैं। नगरवासी और वृद्ध राजा शोक में डूब जाते हैं। वे नदियाँ पार करते हुए वनवासियों और ऋषियों से मिलते हैं तथा चित्रकूट में निवास करते हैं। पुत्र-वियोग के दुःख में दशरथ का देहांत हो जाता है।
यह प्रसंग धर्म, करुणा और निर्णयों के परिणाम पर विचार करने की प्रेरणा देता है। संपूर्ण कथा का क्रम समझने के लिए काण्ड के अगले अध्याय भी पढ़ें।
