अरण्यकाण्ड — 3 में से भाग 2। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।
शूर्पणखा के प्रसंग से शक्तिशाली राक्षसों से वैर बढ़ता है। मारीच आकर्षक स्वर्णमृग का रूप लेकर राम को कुटिया से दूर ले जाता है। अवसर पाकर रावण सीता का अपहरण करता है; सीता इसका विरोध करती हैं। वृद्ध जटायु रावण से वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। लौटने पर राम सीता को न पाकर व्याकुल होकर खोज शुरू करते हैं।
यह प्रसंग धर्म, करुणा और निर्णयों के परिणाम पर विचार करने की प्रेरणा देता है। संपूर्ण कथा का क्रम समझने के लिए काण्ड के अगले अध्याय भी पढ़ें।
