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रामायण · Aranya Kanda

जटायु, शबरी और सीता की खोज

अरण्यकाण्ड — 3 में से भाग 3। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।

जटायु, शबरी और सीता की खोज

अरण्यकाण्ड — 3 में से भाग 3। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।

राम और लक्ष्मण अंतिम समय में जटायु का सम्मान करते हैं; उनके साहस से अपहरण का संकेत मिलता है। दोनों दक्षिण दिशा में कठिन यात्रा करते हैं और शबरी के आश्रम पहुँचते हैं। शबरी की प्रतीक्षापूर्ण भक्ति और स्नेहपूर्ण आतिथ्य का प्रसंग प्रसिद्ध है। वे राम को पम्पा क्षेत्र तथा सुग्रीव की ओर जाने का मार्ग बताती हैं। प्रेम, शोक और आशा से भरी खोज आगे बढ़ती है।

यह प्रसंग धर्म, करुणा और निर्णयों के परिणाम पर विचार करने की प्रेरणा देता है। संपूर्ण कथा का क्रम समझने के लिए काण्ड के अगले अध्याय भी पढ़ें।

पाठ संबंधी सूचना

यह हमारा मौलिक संक्षिप्त पुनर्कथन/मार्गदर्शक है; मूल ग्रंथ के समस्त श्लोक या किसी आधुनिक अनुवाद की प्रतिलिपि नहीं है। अलग परंपराओं में कुछ विवरण अलग हो सकते हैं।

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