उत्तरकाण्ड — 3 में से भाग 1। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।
उत्तरकाण्ड में राजधर्म, लोकमत और सीता की गरिमा के बीच कठिन तनाव आता है। सीता निर्दोष होते हुए भी राम से अलग होकर वाल्मीकि आश्रम में रहती हैं। अलग-अलग परंपराएँ इन प्रसंगों की भिन्न व्याख्या करती हैं और उन पर विमर्श होता है। यह कथा कर्तव्य के नाम पर लिए गए निर्णयों की मानवीय पीड़ा पर विचार कराती है।
यह प्रसंग धर्म, करुणा और निर्णयों के परिणाम पर विचार करने की प्रेरणा देता है। संपूर्ण कथा का क्रम समझने के लिए काण्ड के अगले अध्याय भी पढ़ें।
