युद्धकाण्ड — 3 में से भाग 1। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।
राम की सेना सागर तट पहुँचती है। सामूहिक परिश्रम, योजना और दृढ़ निश्चय से लंका तक सेतु बनाया जाता है, जिसे परंपरा में नल तथा वानर सेना से जोड़ा जाता है। विभीषण रावण का साथ छोड़कर राम की शरण आते हैं और उन्हें संरक्षण मिलता है। सेनाएँ लंका पहुँचती हैं; युद्ध टालने का प्रयास सफल नहीं होता।
यह प्रसंग धर्म, करुणा और निर्णयों के परिणाम पर विचार करने की प्रेरणा देता है। संपूर्ण कथा का क्रम समझने के लिए काण्ड के अगले अध्याय भी पढ़ें।
