युद्धकाण्ड — 3 में से भाग 2। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।
लंबा युद्ध दोनों पक्षों की परीक्षा लेता है। अनेक योद्धा वीरगति पाते हैं और लक्ष्मण गंभीर रूप से घायल होते हैं; प्रसिद्ध परंपरा में हनुमान संजीवनी युक्त पर्वत लेकर आते हैं। कुम्भकर्ण और मेघनाद मारे जाते हैं। अंततः राम रावण का सामना कर उसका वध करते हैं और सीता की बंदी अवस्था तथा अत्याचारी शासन का अंत होता है।
यह प्रसंग धर्म, करुणा और निर्णयों के परिणाम पर विचार करने की प्रेरणा देता है। संपूर्ण कथा का क्रम समझने के लिए काण्ड के अगले अध्याय भी पढ़ें।
